
Agahan Amavasya Ka Mahatva: हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष अर्थात अगहन महीने की अमावस्या को अगहन अमावस्या कहते हैं। यह साल की अंतिम अमावस्याओं में से एक है और पितृ तर्पण के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने दान पुण्य करने और पितरों को तर्पण देने की परंपरा है।
इसके अलावा विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सौभाग्य की कामना के लिए अगहन अमावस्या का कठोर व्रत रखते हैं। इस व्रत सबसे महत्वपूर्ण है पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा और उसकी पूजा जिससे जीवन की हर बाधा दूर हो जाती है। हां यह जानते हैं अगहन अमावस्या का महत्व और उसकी पौराणिक कथा।
अगहन अमावस्या का धार्मिक महत्व(Agahan Amavasya Ka Mahatva)
अमावस्या तिथि को पितृलोक से हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे उत्तम दिन माना गया है। खासकर अगहन अमावस्या पर गया प्रयाग गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान और दान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और कुल में सुख शांति बनी रहती है।
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महिलाओं के लिए यह व्रत सौभाग्य प्राप्ति व्रत के रूप में विख्यात है। इस दिन निराहार रहकर या फलाहार करके पति की लंबी उम्र की प्रार्थना की जाती है। माना जाता है कि इस व्रत से वैधव्य योग दूर होता है और दांपत्य जीवन सुखमय रहता है।
अगहन अमावस्या व्रत की चमत्कारी कथा
प्राचीन काल में एक गरीब ब्राह्मण पति-पत्नी की बहुत सुंदर और गुणवान कन्या थी। जब उसकी कुंडली देखी गई तो ज्योतिषी ने बताया कि उसके हाथ में विवाह की रेखा नहीं है, अर्थात विवाह के बाद वह जल्दी ही विधवा हो जाएगी। दुखी ब्राह्मण एक साधु महाराज के पास पहुंचा।
साधु ने कहा कि नजदीक के गांव में सोना नाम की एक परम् पतिव्रता धोबिन रहती है। यदि तुम्हारी कन्या उसकी सेवा करें और सोना अपनी मांग का सिंदूर उसे कन्या के माथे पर लगा दे तो उसका वैधव्य योग मिट जाएगा।
कन्या रोज सुबह-सुबह चुपके से धोबिन के घर जाती है और उसके घर के सारे काम करती- बर्तन मांजती, झाड़ू लगाती, कपड़े धोती और चली जाती। एक दिन धोबिन ने उसे देख लिया और कारण पूछा। बात सुनकर धोबिन द्रवित हो गई और बोली, बेटी मैं अभी सिंदूर लगा देता हूं। जैसे उसने अपनी मांग से सिंदूर निकाल कर कन्या की मांग में लगाया, उसी क्षण दूर गांव में उसके पति की अचानक मृत्यु हो गई धोबिन विधवा हो गई।
धोबिन फूट-फूट कर रोने लगी। उस दिन संयोग से अगहन अमावस्या थी। वह निराहार थी और रास्ते में एक पीपल का पेड़ देखकर उसके पास आई। दुख से व्याकुल होकर उसने पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा लगाई और भगवान से अपने पति को लौटाने की प्रार्थना की। उसके पति व्रत धर्म और अमावस्या के पुण्य तथा पीपल की परिक्रमा के प्रभाव से चमत्कार हुआ और उसका मरा हुआ पति जीवित हो उठा।
कथा का संदेश और व्रत विधि(Agahan Amavasya Ka Mahatva)
इस कथा से यह सिद्ध होता है कि अगहन अमावस्या का व्रत और पीपल के पेड़ के 108 परिक्रमा जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या को भी हल कर सकती है। आज भी लाखों महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और शाम को पीपल के पेड़ में जल चढ़कर बीट जलाकर 108 परिक्रमा करके अपने सुहाग की रक्षा करने की प्रार्थना करती है।
इस वर्ष 2025 में अगहन अमावस्या 20 दिसंबर को है यदि आप भी अपने परिवार में सुख शांति और पति की लंबी उम्र चाहते हैं तो इस पवित्र व्रत को अवश्य करें। पीपल के नीचे ओम नमो भगवते वासुदेवाय या ओम ब्राह्मणी नमः मंत्र का जाप करते हुए परिक्रमा करें मान्यता है कि इससे एक साथ जन्मों के पाप नष्ट होते हैं