
Bhado Ganesh Chaturthi Vrat Katha: भादो महीने में आने वाली गणेश चतुर्थी जिसे भादो गणेश चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। यह त्योहार भादो मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थ तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता और मंगल मूर्ति कहे जाने वाले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। आज हम गणेश चतुर्थी व्रत की कथा (Ganesh Chaturthi Vrat Katha) के बारे में जानेंगे साथ में इसकी पूजा विधि पर भी विशेष रूप से चर्चा करेंगे।
भादो गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश चतुर्थी हर महीने में दो बार- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है। भादो मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भादवा चौथ या संकष्टी चौथ कहा जाता है जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह व्रत गणेश जी की कृपा प्राप्त करके जीवन के संकटों को दूर करने और सुख समृद्धि पाने के लिए किया जाता है। इस व्रत को करने से भक्तों के सभी देखने दूर होते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती है। यह व्रत खास तौर पर संतान प्राप्ति के लिए सुखी वैवाहिक जीवन के लिए और समृद्धि के लिए किया जाता है।
भादो की संकष्टी चतुर्थी को हेरंंभ संकष्टी के नाम से जाना जाता है इस दिन भगवान गणेश के साथ-साथ शिव जी, श्री कृष्ण और गायों की पूजा करनी विधान है यह व्रत उन भक्तों के लिए विशेष है जो जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करना चाहते हैं।
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भादो गणेश चतुर्थी व्रत कथा
भालू गणेश चतुर्थी की सबसे प्रचलित कथा राजा नल और उनकी पत्नी दमयंती से संबंधित है। कई पौराणिक ग्रंथों में इस कथा का वर्णन मिलता है (Bhado Ganesh Chaturthi Vrat Katha)-
पौराणिक काल में नल नाम के एक यशस्वी और पुण्य आत्मा राजा थे जिनकी पत्नी दमयंती बहुत ही सुंदर और धर्म परायण स्त्री थी। एक बार एक श्राप के कारण राजा नल ने अपना राज्य संपदा और वैभव खो दिया। उनके महल को डाकुओं ने लूट लिया गजसाला से हाथी और घुड़साल से घोड़े चुरा लिए और उनका महल भी अग्नि में भस्म हो गया। जुए में हारने के कारण राजा नल में अपना सब कुछ गवा दिया और असहाय होकर अपनी पत्नी दमयंती के साथ वन में चले गए।
वन में निवास करते समय श्राप के असर से राजा नल और दमयंती अलग हो जाते हैं। राजा नल किसी नगर में साईस (घोड़ों की देखरेख करने वाला) बनकर काम करने लगे, जबकि दमयंती एक अन्य नगर में भटकने लगी। इस दौरान दमयंती को वन में महर्षि शरभंग के दर्शन हुए दमयंती में उन्हें अपनी व्यथा सुनाई और अपने पति से मिलने का उपाय पूछा।
महर्षि शरभंग ने दमयंती को भादो मास की संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा “हे दमयंती भादो की चौथ को भगवान गणेश की विधि व्रत पूजा करो। इस व्रत के फल से तुम्हारे से लेकर के दूर होंगे और तुम्हें अपने पति और पुत्र की प्राप्ति होगी।”
दमयंती मुनि के बताए तरीके से पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भादो संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया। उन्होंने विधि विधान से ही गणेश जी की पूजा की और कथा (Ganesh Chaturthi Ki Katha) सुनी। इस व्रत के प्रभाव से 7 महीने के भीतर की दमयंती का अपने पति राजा नल और पुत्र से मिलन हुआ। उनके सभी कष्ट दूर हुए और उन्होंने अपने खोए हुए राज्य और वैभव को फिर से प्राप्त किया। तभी से यह व्रत विघ्नहर्ता और समृद्धि प्रदान करने वाला कहा जाता है।
भादो गणेश चतुर्थी की पूजा विधि
माधव गणेश चतुर्थी व्रत की पूजा पूरी विधि विधान से करने का तरीका हम आपको बताने जा रहे हैं-
प्रातः काल में व्रत का संकल्प– प्रातः काल में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर गणेश जी के सामने व्रत का संकल्प लें। संकल्प में जल, फूल और अक्षत लें और गणेश जी को अर्पण करें।
पूजन की तैयारी– साफ करें और साफ करें और ईशान कोण में रंगोली बनाएं। पूजा की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें।
कलश स्थापना करें– एक लोटे में जल भरकर उसके ऊपर नारियल रखें और लाल धागा बांधे अब इस कलश को पूजा स्थल पर रखें। यह कलश पूजा के दौरान स्थापित रहता है।
गणेश जी की पूजा– गणेश जी को जल चंदन कुमकुम अक्षर फूल दूर्वा और माला अर्पित करें। गणेश जी को मोदक लड्डू और मौसमी फल भोग के रूप में चढ़ाएँ। याद रहे की गणेश जी को तुलसी का पत्ता नहीं चढ़ाया जाता।
व्रत कथा और आरती– गणेश चतुर्थी की कथा पढ़े (Bhado Ganesh Chaturthi Vrat Katha) या सुनें इसके बाद घी का दिया जलाकर गणेश जी की आरती करें।
चंद्र दर्शन, अर्घ्य और प्रसाद वितरण– पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और अन्य भक्तों में बाँटें। रात में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें
भादो गणेश चतुर्थी के लाभ
भादो गणेश चतुर्थी का व्रत करने से भक्तों को ये लाभ प्राप्त होते हैं-
- यह व्रत भक्त के जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है।
- यह व्रत धन, वैभव और सुखी जीवन प्रदान करता है।
- यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए विशेष रूप से फलदायी है।
- भगवान गणेश भक्त की सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।
- यह व्रत वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाता है।
भादो गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि
पंचांग के अनुसार, भादो मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 12 अगस्त 2025 को है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी 27 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन गणेश जी की मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:04 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक रहेगा। चंद्रोदय का समय रात 8:51 बजे होगा।
FAQ- Bhado Ganesh Chaturthi Vrat Katha
2025 में भाद्रपद गणेश चतुर्थी कब है?
भादो मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 12 अगस्त 2025 को है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी 27 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन गणेश जी की मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:04 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक रहेगा।
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