
Rishi Panchami 2025: प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। इस पर्व का संबंध सप्त ऋषियों के साथ माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा करता है तो जीवन में अनजाने में किए गए दोष भी गल जाते हैं।
जी हां यह एक ऐसा महापर्व है जो आपको एक विशिष्ट संधि प्रदान करता है। आमतौर पर अनजाने में किए गए गलतियों का भी दोष और पाप लगता है। अक्सर इसे गलाने के लिए अथाह व्रत, पूजा और तप लगता है। परंतु ऋषि पंचमी के पर्व पर आपको इसे आसानी से दूर करने की संधि प्रदान की जाती है अर्थात ऋषि पंचमी का पर्व आत्म शुद्धि का साधन है।
पंचमी के दिन सप्त ऋषियों कश्यप ऋषि, अत्रि ऋषि, भारद्वाज ऋषि, विश्वामित्र ऋषि, गौतम ऋषि, जमदग्नि ऋषि और वशिष्ठ ऋषि की पूजा की जाती है। यह सप्त ऋषि महान ऋषि परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन ऋषियों की वजह से ही आज मानवता को धर्म वेद आयुर्वेद ज्योतिष और योग्य जैसे अमूल्य उपहार मिले हैं। इन्हीं विषयों की तपस्या की वजह से आज हम आसान जीवन का निर्वहन कर रहे हैं और योग और तपस्या के बारे में सीख रहे हैं।
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ऋषि पंचमी का महत्व
ऋषि पंचमी केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं परंतु आध्यात्मिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि यदि कोई महिला मासिक धर्म या दैनिक आचरण में शास्त्र विरुद्ध अशुद्ध हो चुकी है तो ऋषि पंचमी का व्रत के द्वारा सारे दोष मिटा सकती है। जी हां मासिक धर्म के दौरान महिलाएं यदि गलती से भी कुछ ऐसा कर देती है जो शास्त्र के विरुद्ध है या अपने दैनिक आचरण में कोई महिला किसी प्रकार की कोई गलती कर बैठी है तो ऋषि पंचमी का व्रत और पूजा करवा इस दोष को मिटा सकती है।
यह घटना केवल महिलाओं के लिए फलीभूत होती है परंतु पुरुषों के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है। शास्त्रों में कहा जाता है कि इस दिन किया गया व्रत सात जन्मों के पापों को मिटाने वाला है। यह व्रत ऋषियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है। इस व्रत के माध्यम से हम जीवन में ऋषियों के आदर्शों का पालन कर पाते हैं और अपने जीवन में अनुशासन संयम और सात्विक विचारधारा ला पाते हैं।
ऋषि पंचमी पूजा विधि
ऋषि पंचमी के दिन कुछ विशेष नियम और विधियों का पालन कर आप पूजा अर्चना कर सकते हैं। ऋषि पंचमी के दिन प्रात काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र जल से स्नान करना चाहिए। संभव हो सके तो नदियों या तालाबों स्नान करने का विशेष महत्व बताया जाता है। स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर पवित्र मन से सप्त ऋषियों की आराधना करनी चाहिए।
इसके पश्चात पूजा के दौरान पूजन सामग्री की तैयारी कर लेनी चाहिए, जैसे कि पूजा में चंदन, फूल, धूप, दीप, अक्षत, नैवेद्य, फल, दूर्वा, तुलसी, पंचामृत का उपयोग करना चाहिए। इसके पश्चात सप्तर्षियों की प्रतिमा या चित्र के सामने आप आसन बिछाकर पूजा कर सकते हैं। सप्तर्षियों के साथ अरुंधती देवी की भी पूजा करनी चाहिए। आप सप्तर्षियों के नाम का स्मरण करते हुए गायत्री मंत्र का जाप कर सकते हैं।
स्त्रियां चाहे तो इस दिन निर्जला व्रत रख सकती हैं अथवा केवल फलाहार व्रत का पालन भी कर सकती है। दिन के अंत में ब्राह्मण को भोजन करना और दान दक्षिणा देना आवश्यक माना जाता है। रात्रि में व्रत का समापन कर फलाहार ग्रहण किया जा सकता है।
ऋषि पंचमी के दिन किए जाने वाले उपाय
ऋषि पंचमी के दिन केवल व्रत और पूजा अर्चना का ही महत्व नहीं बल्कि इस दिन कुछ विशेष उपायों का भी वर्णन किया जाता है, जिससे जीवन की कठिनाइयां दूर हो जाती हैं-
ऋषि नाम स्मरण- सप्तर्षियों के नाम का जाप करने से मन की शुद्धि और ज्ञान की वृद्धि होती है। ऋषि पंचमी के दिन आप चाहे तो पूरा दिन सप्तर्षियों का नाम स्मरण कर इस व्रत का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
तुलसी पूजन– इस दिन तुलसी माता को गंगाजल चढ़ा कर दीप जलाने से परिवार में सुख समृद्धि आती है। तुलसी मां की 108 परिक्रमा करने से भी घर में आर्थिक सुख संपदा का प्रवेश होता है।
गाय को भोजन– इस दिन गाय को हरा चना और गुड़ खिलाने से जीवन में शुभ फल मिलते हैं। वहीं यदि कोई व्यक्ति इस दिन गाय को केले और हरी मूंग अर्पित करता है तो जीवन में संकट दूर होने लगते हैं।
दान पुण्य– इस दिन दान पुण्य का विशेष महत्व कहा जाता है। ब्राह्मणों को अन्न वस्त्र दक्षिणा देने से इस दिन पितृ दोष और काल दोष दूर हो जाते हैं।
संत सेवा- ऋषि पंचमी के दिन यदि आप साधु संतों की सेवा करते हैं तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। आप चाहे तो मंदिरों में पूजा करने वाले पंडितों को भी यथासंभव दान दे सकते हैं।
गायत्री मंत्र का जाप– इस दिन सूर्यास्त से पहले यदि 108 बार गायत्री मंत्र का जाप किया गया तो जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती है और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार ऋषि पंचमी का यह पर्व न केवल ऋषियों की महान परंपरा को स्मरण करने और उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का दिन है बल्कि यह पर्व आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ने का भी विशेष अवसर है। ऋषि पंचमी का व्रत कर जहां एक और महिलाएं और पुरुष अपने जीवन के अनजाने में किए गए पापों को धोते हैं। वहीं आध्यात्मिक रूप से ब्रह्मांड के साथ अपनी ऊर्जा को भी जोड़ते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर भौतिक और आध्यात्मिक सुख हासिल करते हैं।
FAQ- Rishi Panchami 2025
ऋषि पंचमी के दिन भोजन में क्या खाना चाहिए?
ऋषि पंचमी के दिन भोजन के रूप में मुख्यतः साथी का चावल खाने की परंपरा है जिसे आम भाषा में मोरधन कहा जाता है। इसके अलावा इस दिन दही भी भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस दिन हाल द्वारा उपजाये हुए अनाज का सेवन वर्जित है