
Chhoti Diwali Hanuman Puja: दीपोत्सव का दूसरा दिन छोटी दीवाली अर्थात नरक चतुर्दशी कहलाता है। यह दिन केवल दीप जलाने का नहीं होता बल्कि इस दिन हनुमान जी की आराधना का भी शुभ अवसर कहा जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि यह रात नकारात्मक शक्तियों की सक्रिय रात होती है और हनुमान ऐसे देवता हैं जो हर प्रकार की अशुभता भय और बाधाओं का नाश करते हैं।
इसीलिए छोटी दीवाली पर राम जी के पहरेदार हनुमान जी की पूजा विशेष फलदाई मानी जाती है। इस दिन हनुमान जी पर सिंदूर चढ़ाने की परंपरा भी अत्यंत प्राचीन है जो यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा के साथ नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी की आराधना करता है और सिंदूर चढ़ाता है तो उसके जीवन से दुख, दरिद्रता और रोग नाश हो जाते हैं।
छोटी दीवाली पर हनुमान पूजा का महत्व
छोटी दिवाली का पर्व आत्मा के अंधकार मिटाने का प्रतीक है और इस दिन हनुमान की उपासना व्यक्ति के मन से और सुरक्षा और नकारात्मकता की भावना को समाप्त करती है। यह रात तांत्रिक ऊर्जाओं की सक्रिय रात्रि होती है ऐसे में हनुमान जी भूत प्रेत को निकट नहीं आने देते। इसलिए उनकी आराधना करना परिवार की सुरक्षा के लिए जरूरी है। जो व्यक्ति शनि ग्रह की पीड़ा या ग्रह बाधा से परेशान है वह इस दिन यदि हनुमान की आराधना करता है तो शनि देव भी उन्हें परेशान नहीं करते। छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी की पूजा करने से माता लक्ष्मी भी स्थिर होती है और मन में आत्म बल बढ़ता है।
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छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी की पूजा कैसे करें
छोटी दिवाली के दिन प्रातःकाल स्नान इत्यादि कर लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात हनुमान जी की मूर्ति को पूजा स्थल में विराजित करें। तत्पश्चात मूर्ति के समक्ष घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। हनुमान को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। तत्पश्चात 108 बार ॐ हनुमते नमः मंत्र का जाप करें और भगवान को गुड़ और चने का भोग लगाएँ। इस दिन संध्या के समय हनुमान मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाना है।

छोटी दीवाली पर हनुमान जी पर सिंदूर चढ़ाने का महत्व
कहा जाता है कि हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। सिंदूर चढ़ाने के पीछे की कथा भी अत्यंत भावपूर्ण है। मान्यता है कि जब माता सीता ने श्री राम के मस्तक पर सिंदूर लगाया तो हनुमान जी ने पूछा कि आप ये क्यों लगाती हैं, तो सीता जी ने उत्तर दिया कि इससे श्री राम की आयु लंबी हो जाएगी। भोले भाले हनुमान जी ने अपने संपूर्ण शरीर पर सिंदूर लगाया क्योंकि वे चाहते थे कि राम की आयु अनन्त काल तक रहे।
इसीलिए जब कभी हनुमान जी को सिंदूर लगाया जाता है तो वह अत्यंत प्रसन्न होते हैं। छोटी दीवाली पर भी यदि आप हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल जरूर अर्पित करें क्योंकि ऐसा करने से उनके प्रभु राम अनंत काल तक अमर रहेंगे और हनुमान इस कार्य से प्रसन्न होंगे।
छोटी दीवाली पर हनुमान को सिंदूर अर्पित करने के लाभ
छोटी दिवाली के दिन यदि आपने प्रभु हनुमान को सिंदूर और चमेली का चोला चढ़ाया तो वह आपके घर से नकारात्मकता और दरिद्रता को दूर कर देते हैं। ऐसा करने पर आपके जीवन में साहस शक्ति और सफलता का संचार होता है यहां तक कि शनि दोष भी कम हो जाता है और व्यक्ति को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यदि आपको लंबे समय से आर्थिक परेशानियां तंग कर रही थीं या नौकरी में तरक्की नहीं हो रही थी तो अचानक से मार्ग खुलने लगते हैं। माता लक्ष्मी भी हनुमान भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं और उन्हें सुख शांति समृद्धि प्रदान करती हैं।

छोटी दिवाली का पावन पर्व हम हनुमान की भक्ति में डूबने का अवसर है इस दिन यदि कोई भक्त सच्चे मन से हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करता है तो निश्चित ही उसके जीवन से सारे अंधकार मिट जाते हैं।
FAQ- Chhoti Diwali Hanuman Puja
छोटी दिवाली के दिन किसकी पूजा करनी चाहिए?
छोटी दीवाली पर हनुमान जी की पूजा विशेष फलदाई मानी जाती है। इस दिन हनुमान जी पर सिंदूर चढ़ाने की परंपरा भी अत्यंत प्राचीन है। यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा के साथ नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी की आराधना करता है और सिंदूर चढ़ाता है तो उसके जीवन से दुख, दरिद्रता और रोग नाश हो जाते हैं।
छोटी दीवाली पर कितने दीपक जलाना चाहिए?
छोटी दीवाली पर घर में पांच दीपक जलाने चाहिए। पहला दिया मंदिर में, दूसरा रसोई में, तीसरा पानी रखने की जगह पर, चौथा पीपल के पेड़ नीचे और पांचवा दिया घर के मुख्य द्वार पर जलाना चाहिए।
चार बाती वाला दीपक कब जलाना चाहिए?
चार बाती वाला दीपक नरक चौदस या दीवाली के दिन जलाना चाहिए। यह दीपक घर में सुख समृद्धि शांति लाने और बाधाओं को दूर करने के लिए जलाया जाता है।
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