धनतेरस पर धन्वंतरि पूजा से पाएँ रोग मुक्ति और अमृत स्वास्थ्य का वरदान

Dhanvantari Puja Vidhi
Dhanvantari Puja Vidhi

Dhanvantari Puja Vidhi: धनतेरस का पर्व धन संपत्ति प्राप्त करने का पर्व नहीं परंतु यह स्वास्थ, दीर्घायु और आयुर्वेद की दिव्यता का दिन है। शास्त्रों में वर्णित है कि धनतेरस के दिन ही समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यह अमृत कलश स्वास्थ्य और दीर्घायु होने का वरदान है। इसीलिए भगवान धन्वंतरि को देवताओं के वैद्य भी कहा जाता है। आज के युग में जहां विभिन्न प्रकार की बीमारियां तनाव, मानसिक अशांति  हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है ऐसे में भगवान धनवंतरी की पूजा करना भी अब बहुत जरूरी हो गया है।

जिस प्रकार हम विद्या के लिए मां सरस्वती और गणेश जी की आराधना करते हैं। धन के लिए माता लक्ष्मी और कुबेर की आराधना करते हैं। उसी प्रकार शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा करनी चाहिए और उनकी पूजा करने के लिए धनतेरस से श्रेष्ठ दिन और कुछ नहीं हो सकता। इसीलिए आज के इस लेख में हम आपको धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का महत्व और विधि बताने वाले हैं ताकि आप भी इस दिन धन प्राप्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य का वरदान भी प्राप्त कर सकें।

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आइये सबसे पहले जानते हैं धनतेरस का महत्व क्या होता है?

दीपावली के पांच विशेष दिनों में सबसे पहला दिन धनतेरस होता है। यह अमावस्या से पहले पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। अर्थात कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि धनतेरस कहलाती है। यह दिन भगवान धन्वंतरि को समर्पित होता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे और उन्हें देवताओं के वैद्य होने का दर्जा दिया गया था। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद के देवता भी माना जाता है जो स्वास्थ्य और दीर्घायु का वरदान देते हैं। ऐसे में इस दिन यदि विशेष नियमों का पालन कर धन्वंतरी भगवान की पूजा की गई तो निश्चित ही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं।

Dhanteras Par Dhanvantari Puja Kyu Karte Hai
Dhanteras Par Dhanvantari Puja Kyu Karte Hai

धनतेरस का पूजा समय 

धनतेरस के दिन पूजा के लिए सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसके अलावा शाम की प्रदोष काल की पूजा भी सर्वश्रेष्ठ कही जाती है। धनतेरस के दिन से ही दीप प्रज्वलित करने की प्रथा मानी जाती है। ऐसे में इस दिन सुबह और शाम दीप अवश्य जलाएं। यह दीप घी के हो अथवा तिल के तेल के तो यह सर्वश्रेष्ठ कहे जाते हैं। वर्ष 2025 में धनतेरस का त्योहार 18 अक्टूबर 2025 को पड़ रहा है।

धनतेरस पर आवश्यक पूजा सामग्री 

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री आवश्यक रूप से तैयार रखें- 

  • भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र 
  • सोने या चांदी का दीपक, यदि संभव नहीं है तो पीतल या तांबे का दीपक 
  • धूप, अगरबत्ती, फूल, विशेष रूप से कमल और गुलाब के फूल 
  • मूर्ति रखने के लिए लाल या पीले रंग का कपड़ा
  • हल्दी, केसर, अक्षत, कलश, साफ जल, नारियल, पान या आम के पत्ते,
  • मिठाई, फल, पंचामृत
Dhanteras Par Dhanvantari Puja ki Vidhi
Dhanteras Par Dhanvantari Puja ki Vidhi

धन्वंतरि पूजा विधि(Dhanvantari Puja Vidhi)

इस दिन सुबह सवेरे स्नान इत्यादि कर निवृत होकर पूजा स्थल की सफाई करें। पूजा स्थल पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएँ। यहां धन्वंतरि जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद एक कलश लें इसमें साफ जल भरें। इस कलश में थोड़ा सा गंगाजल और तुलसी के पत्ते तथा हल्दी की एक गांठ डालकर धनवंतरी जी की प्रतिमा के सामने रख दे।

इसके बाद दीपक जलाएं और धूप अगरबत्ती से वातावरण को पवित्र करें। तत्पश्चात धन्वंतरी भगवान की प्रतिमा पर पंचामृत से अभिषेक करें। यदि अभिषेक करना संभव नहीं तो केवल हाथ जोड़कर आह्वान करें।

इसके बाद धन्वंतरी भगवान के सामने हल्दी, अक्षत, पुष्प अर्पित करें और 108 बार ‘ओम धनवंतरी आयुर्वेदय नमः’  इस मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान को भोग अर्पित करें और परिवार जनों में वितरित करें। तत्पश्चात पूजा के दीपक को घर के मुख्य द्वार या दक्षिण पूर्व दिशा में रखें।

धन्वंतरि पूजा के विशेष लाभ

  • धन्वंतरी भगवान की पूजा करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और परिवारजनों को बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
  • धन्वंतरि भगवान आयुर्वेद के देवता है जो घर में संपत्ति और आर्थिक स्थिरता लाते हैं।
  • धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से परिवार के सदस्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • धनतेरस का दिन शुभ कार्य के लिए भी अत्यंत सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • इस दिन नया कार्य शुरू करने पर सफलता जरूर मिलती है और साधना करने वाले साधक को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
Dhanvantari Puja ke Labh
Dhanvantari Puja ke Labh

धनतेरस की पूजा का ज्योतिषिय महत्त्व

धनतेरस के दिन यदि शुभ योग या नक्षत्र को ध्यान में रखकर पूजा की गई तो निश्चित ही अत्यधिक लाभ मिलता है। धन्वंतरि पूजा के दौरान यदि गजकेसरी योग या शुभ योग के दौरान अनुष्ठान किया गया तो यह फल कई गुना बढ़ जाता है। बृहस्पति और चंद्रमा की दृष्टि व्यक्ति के स्वास्थ्य, ज्ञान और आर्थिक स्थिति में सुधार करती है। ऐसे में संभव हो सके तो शुभ योग की गणना कर ही पूजा आरंभ करें।

कुल मिलाकर धनतेरस पर धन्वंतरि की पूजा न केवल स्वास्थ्य परंतु धन की वृद्धि भी करती है। साथ ही मानसिक शांति व्यावसायिक सफलता भी प्रदान करती है। इस दिन बताए गए तरीके से यदि पूजा की गई तो सकारात्मक ऊर्जा और बुद्धिमत्ता का संचार होता है। वही उचित स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति के लिए धनतेरस के साथ-साथ धन्वंतरि भगवान के मंत्र का पाठ रोजाना करने से निश्चित ही स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु होने का वरदान मिलता है।

FAQ- Dhanvantari Puja Vidhi

धन्वंतरि जी का मंत्र क्या है?

धन्वंतरि जी का मंत्र ‘ओम धनवंतरी आयुर्वेदय नमः’ है। धनतेरस के दिन धन्वंतरि पूजा के दौरान इस मंत्र का 108 बार जाप करना बहुत ही शुभ फल देता है। 

Anu Pal

मैं अनु पाल, Wisdom Hindi ब्लॉग की फाउंडर हूँ। मैं इंदौर मध्य प्रदेश की रहने वाली हूं। मैं एक ब्लॉगर और Content Writer के साथ-साथ Copy Editor हूं और 5 साल से यह काम कर रही हूं। पढ़ने में मेरी विशेष रूचि है और मैं धर्म, आध्यात्म, Manifestation आदि विषयों पर आर्टिकल्स लिखती हूं।

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