
Radha Ashtami ke Upay: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी पर्व मनाया जाता है। जन्माष्टमी के लगभग 15 दिनों बाद राधा अष्टमी का पर्व पड़ता हैम मान्यता है कि इसी दिन पर ब्रजभूमि में श्री राधा रानी का अवतरण हुआ था। बिना श्री कृष्ण के राधा का नाम अधूरा है और राधा के बिना कृष्ण भी पूर्ण नहीं हैं। ऐसे में कृष्ण के बाद राधा का जन्म भी धरती पर हुआ।
राधा रानी माता लक्ष्मी का अवतार कही जाती है। इसलिए राधा अष्टमी पर श्रद्धा भाव से राधा रानी की पूजा अर्चना होती है। वे सभी साधक जो इस दिन भक्ति भाव से राधा रानी की पूजा अर्चना करते हैं, विशेष उपाय करते हैं, उन्हें मनचाहे वरदानों की प्राप्ति होती है। और आज के इस लेख में हम आपको ऐसे ही तीन सिद्ध उपाय बताने वाले हैं जिन्हें राधा अष्टमी पर करने से आपको राधा रानी का विशेष आशीर्वाद मिलता है।
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राधा अष्टमी पर किए जाने वाले महा उपाय(Radha Ashtami ke Upay)
राधा रानी के 32 नाम का जाप: राधा अष्टमी के पूर्व प्रतिदिन सूर्योदय से पहले राधा रानी के 32 नाम का जाप करना अत्यंत शुभ फलदाई माना जाता है। यह जब मन को शुद्ध करता है और साधक के जीवन की कठिनाइयां दूर करता है। राधा रानी के इन 32 नाम को श्री कृष्ण के हृदय की गूंज माना जाता है। इसे श्री राधाअष्टोत्तरत्रिंशन्नाम जाता है। यदि कोई व्यक्ति 7 दिनों तक लगातार राधा रानी के इस स्तोत्र का जाप करता है तो उसके जीवन के अटके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं।
राधा रानी के 32 नाम
राधा
वृषभानुजा
गान्धर्वा
गोपवधू
यशस्विनी
गोपेश्वरी
वृषभानुसुता
वृषभानुकुमारी
कृपामयी
करुणामयी
माधवी
माधवप्रिया
सर्वेश्वरी
शतानन्दा
वृषभानुकुलेश्वरी
गोपवल्लभा
कृष्णप्रिया
कृष्णा
कृष्णवल्लभा
श्रीराधिका
श्रीदेवी
ललिता-सखी
विशाखा-सखी
चन्द्रावली-सखी
रासेश्वरी
वृन्दावनेश्वरी
व्रजेश्वरी
व्रजराजा-नन्दिता
व्रजवल्लभा
करुणारस-सम्पन्ना
प्रेममूर्ति
श्रीराधा ठाकुरानी

राधा रानी का भोग अर्पण: राधा अष्टमी के दिन राधा रानी को उनका प्रिय भोग अर्पित करना भी फलदाई माना जाता है। धार्मिक मान्यता अनुसार राधा जी को मीठा और रस पूर्ण भोजन अत्यंत प्रिय है, ऐसे में इस दिन मालपुआ, राबड़ी का भोग राधा रानी को लगाना चाहिए।
इसके बाद राधा रानी को पान का बीड़ा बनवा कर भोग के रूप में अर्पित करना चाहिए। यह भोग प्रेम का प्रतीक है, इसे अर्पित करने से राधा रानी आपके जीवन में मिठास घोलती हैं। भोग लगाने के बाद प्रसाद परिजनों में वितरित करना चाहिए।
108 बार राधा नाम लिखना: राधा अष्टमी के दिन यदि कोई व्यक्ति 108 बार किसी कागज पर राधा नाम लिखता है और उसके बाद कागज को मोड़कर उसे पर एक पीला फूल रख देता है। इसके बाद इसे हाथ में लेकर कोई अधूरी मनोकामना राधा रानी के सामने रखता है और अपने जीवन की गलती के लिए क्षमा मांगता है तो व्यक्ति के जीवन के संपूर्ण संकट दूर हो जाते हैं।
कहा जाता है कि इस उपाय से बड़ी से बड़ी गलती की क्षमा मिल जाती है और अधूरी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्यक्ति को इस कागज को शाम 5:25 पर राधा रानी के मंदिर में अर्पित करना होगा। यह उपाय उन लोगों के लिए काफी कारगर है जो जीवन में लंबे समय से किसी वेदना का अनुभव कर रहे हैं या असंतोष महसूस कर रहे हैं।

राधा अष्टमी पर किए जाने वाले अन्य सरल उपाय
- तुलसी के पौधे के समक्ष राधा नाम स्मरण- राधा रानी के जन्मदिन पर यदि आप तुलसी के पौधे के सामने बैठकर राधे-राधे नाम का जाप करते हैं तो यह अति पुण्यकारी होता है।
- कन्याओं को भोजन– कन्या शक्ति का प्रतीक है ऐसे में राधा अष्टमी के दिन यदि आप छोटी कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन, वस्त्र, मिठाई अर्पित करते हैं तो इससे घर में सौभाग्य आता है।
- राधा कृष्ण मंदिर में दीपदान– राधा अष्टमी के दिन राधा कृष्ण मंदिर में घी का दीपक जलाना चाहिए। इस जीवन का अंधकार मिट जाता है।
इस प्रकार राधास्वामी का पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह जीवन में प्रेम करना और भक्ति भाव को जागृत करने का पवित्र अवसर है। राधा रानी जो स्वयं भक्ति और समर्पण की मूर्ति हैं उनके सामने यदि आप अपने मन की बात कहते हैं और 32 नाम का जाप करते हैं तो राधा रानी की कृपा आपको जरूर प्राप्त होती है।
राधा अष्टमी पर क्या उपाय करना चाहिए?
राधा अष्टमी के पूर्व प्रतिदिन सूर्योदय से पहले राधा रानी के 32 नाम का जाप करना अत्यंत शुभ फलदाई माना जाता है। यह जब मन को शुद्ध करता है और साधक के जीवन की कठिनाइयां दूर करता है। राधा रानी के इन 32 नाम को श्री कृष्ण के हृदय की गूंज माना जाता है। इसे श्री राधाअष्टोत्तरत्रिंशन्नाम जाता है।