Sheetla Ashtami Upay: शीतला अष्टमी, जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो खास तौर पर उत्तर भारत में मनाया जाता है। यह त्यौहार होली के आठवें दिन, यानी चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है, जो हिंदू धर्म में बीमारियों से रक्षा और अच्छी सेहत की देवी मानी जाती हैं। शीतला अष्टमी का मुख्य उद्देश्य बदलते मौसम के कारण होने वाले संक्रमणों से बचाव करना और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना है।

आज के इस आर्टिकल में हम शीतला अष्टमी पर किए जाने वाले कुछ जरूरी उपाय (Sheetla Ashtami Upay) के बारे में चर्चा करेंगे और जानेंगे कि आप किस तरह से शीतला अष्टमी पर शीतला माता की कृपा हासिल कर सकते हैं साथ ही हम शीतला अष्टमी के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पूजा विधि और मुहूर्त के बारे में भी जानेंगे। इसलिए इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें।
शीतला अष्टमी के उपाय| Sheetla Ashtami Upay
शीतला अष्टमी सुख और समृद्धि और निरोगी काया पाने का एक शुभ अवसर है। इस अवसर पर कुछ उपाय करके आप इस दिन का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए हम आपको कुछ मंत्र पाठ और विशेष उपाय बताने जा रहे हैं जो आप इस दिन इस्तेमाल कर सकते हैं। आईए जानते हैं Sheetla Ashtami Upay-
शीतला अष्टमी (Sheetla Ashtami 2025) के मंत्र और पाठ
मंत्र जाप से पाएँ सुख-समृद्धि: यदि आप अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि में वृद्धि करना चाहते हैं, तो शीतला अष्टमी (Sheetla Ashtami) के दिन स्नान करने के बाद शीतला माता का ध्यान करते हुए एक आसन पर बैठें और ‘ऊँ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र जाप आपके परिवार में खुशहाली लेकर आएगा।
स्वास्थ्य और भय से मुक्ति के लिए मंत्र जाप करें: यदि आप किसी प्रकार के भय या स्वास्थ्य संबंधी समस्या से ग्रस्त हैं, तो शीतला अष्टमी के दिन ‘वन्देSहं शीतलां देवीं सर्वरोग भय अपहाम्। यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटक भयं महत्।।’ मंत्र का जाप करें। यह मंत्र जाप आपको बीमारियों और हर भय से छुटकारा दिलाएगा।
शीतला माता की वंदना करें: यदि आप चाहते हैं कि देवी भगवती की कृपा आपके ऊपर हमेशा बनी रहे और साथ ही जीवन में सफलता पाना चाहते हैं, तो शीतला अष्टमी के दिन ‘वन्देहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनी कलशोपेतां सूर्प अलंकृत मस्तकाम्।।’ मंत्र का जाप करें। यह मंत्र जाप आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा।
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शीतला चालीसा का पाठ करें: यदि आप अपनी नौकरी या करियर को लेकर चिंता करते हैं, तो शीतला अष्टमी के दिन शीतला चालीसा का पाठ करें और पाठ के बाद देवी मां को पुष्प अर्पित करें। यह उपाय आपके करियर में स्थिरता और उन्नति लाने में सहायक होगा।
शीतलाष्टक स्तोत्र का पाठ: परिवार की खुशहाली और समृद्धि के लिए शीतला अष्टमी के दिन शीतलाष्टक स्तोत्र का पाठ करें। यह स्तोत्र पाठ आपके परिवार में सुख-शांति और समृद्धि सुनिश्चित करेगा।
शीतला अष्टमी के विशेष उपाय
व्यवसाय की सुरक्षा के लिए नीम की पूजा करें: यदि आप अपने व्यवसाय को अनचाहे खतरों से बचाना चाहते हैं, तो शीतला अष्टमी के दिन स्नान के बाद नीम के पेड़ के पास जाएं और शीतला माता के स्वरूप का ध्यान करते हुए रोली-चावल आदि से पेड़ की पूजा करें। शास्त्रों में नीम का पेड़ शीतला माता का प्रतीक माना जाता है, और इसकी पूजा से व्यवसाय में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
दूध-चावल की खीर का भोग लगाएँ: अपने हर काम में लाभ प्राप्त करने और सफलता सुनिश्चित करने के लिए जन्माष्टमी के दिन दूध-चावल की खीर बनाएं और उससे शीतला माता को भोग लगाएं। भोग के बाद इस खीर को बच्चों में बांटें और ख़ुद भी ग्रहण करें। यह उपाय आपके काम में आने वाली परेशानियों को दूर करेगा।
नीम की माला अर्पित करें: यदि आपके जीवन में उलझनें बढ़ गई हैं और आप शांति पाना चाहते हैं, तो नीम की 21 पत्तियों की माला बनाकर शीतला माता को अर्पित करें। नीम की पत्तियां शीतलता और शुद्धता का प्रतीक हैं, इसलिए यह उपाय आपके जीवन में शांति और संतुलन लाएगा।
घी का दीपक जलाएँ: यदि आप अपनी तरक्की चाहते हैं, तो शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता के सामने घी का दीपक जलाएं और उनकी आरती करें। यह उपाय आपके जीवन में उन्नति और समृद्धि लाएगा।
नीम का पेड़ लगाना: यदि आपका जीवनसाथी किसी प्रकार की परेशानी से जूझ रहा है, तो शीतला अष्टमी के दिन घर के बाहर पश्चिम दिशा में नीम का पेड़ लगाएं और उसकी नियम से देखभाल करें। यह उपाय आपके जीवनसाथी की समस्याओं को दूर करेगा।
चांदी की वस्तु की स्थापना करें: यदि आप अपने जीवनसाथी की सफलता चाहते हैं, तो शीतला अष्टमी दिन चांदी की कोई वस्तु खरीदकर घर के मंदिर में रख दें और उसकी पूजा करें। अगले दिन उस वस्तु को अपने पास रखें या उसका इस्तेमाल करें। यह उपाय आपके जीवनसाथी की उन्नति में सहायक होगा।
दोस्तों इन उपायों को अपना कर आप शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहेगा।
शीतला अष्टमी का वैज्ञानिक दृष्टिकोण| Scientific Significance Of Sheetla Ashtami
शीतला अष्टमी का त्यौहार गर्मियों की शुरुआत में मनाया जाता है, इस समय मौसम में बदलाव के कारण पानी और हवा से होने वाले रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इस समय साफ-सफाई और स्वच्छता पर खास ध्यान देने की ज़रूरत होती है। बासी भोजन के सेवन करने का उद्देश्य शरीर के लिए उन बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीवों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना है, जो इस मौसम में एक्टिव होते हैं। इसके अलावा, नीम के उपयोग का उद्देश्य इसके एंटीबायोटिक गुणों के कारण रोगों से बचाव में सहायक होना है।
शीतला अष्टमी की पूजा विधि| Sheetla Ashtami Puja Vidhi
शीतला अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और बिना आग जलाए बना हुआ खाना (बासी खाना) खाने करने का संकल्प लें। शीतला माता की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें और हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप-दीप से पूजा करें। माता को ठंडे भोजन जैसे बासी रोटियां, मीठे चावल, दही, पूड़ी आदि का भोग लगाएँ। नीम की पत्तियों से जल का छिड़कें क्योंकि यह शीतला माता को प्रिय है।
अब शीतला माता का ध्यान करते हुए ‘ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद शीतला माता की कथा पढ़ें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा के बाद प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। इस दिन घर में चूल्हा जलाने से परहेज किया जाता है और ठंडा भोजन खाया जाता है।
शीतला अष्टमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त (Sheetla Ashtami 2025 Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Sheetla Ashtami 2025) तिथि 22 मार्च 2025 को सुबह 4 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी, और यह 23 मार्च 2025 को सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर ख़त्म होगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 23 मिनट से शाम 6 बजकर 33 मिनट तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 12 घंटे 11 मिनट है।
निष्कर्ष| Conclusion
दोस्तों इस आर्टिकल में हमने आने वाली शीतला अष्टमी क्या अवसर पर किए जाने वाले कुछ मंत्र जाप व विशेष उपाय (Sheetla Ashtami Upay) के बारे में चर्चा की। साथ ही जाना की शीतला अष्टमी का वैज्ञानिक महत्व क्या है और इसकी पूजा विधि और मुहूर्त के बारे में भी जाना।
यह एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो आपको स्वस्थ शरीर और समृद्धि प्राप्त करने में मदद करता है तो इस आर्टिकल में बताए गए उपायों का उपयोग कर आप इस शीतला अष्टमी की पूजा अवश्य करें और इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें ऐसे ही आर्टिकल पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग से जुड़े रहे।
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FAQ- Sheetla Ashtami Upay
शीतला अष्टमी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?
बनाने का उद्देश्य बदलते हुए मौसम के कारण होने वाले संक्रमणों से बचाव और सुख समृद्धि की प्राप्ति करना है।
हिंदू धर्म में शीतला माता को किस चीज की देवी माना गया है?
हिंदू धर्म में शीतला माता को अच्छा स्वास्थ्य देने वाली और बीमारियों से रक्षा करने वाली देवी माना गया है।
शीतला अष्टमी के त्यौहार में नीम के पेड़ को महत्वपूर्ण क्यों माना गया है?
हिंदू शास्त्रों में नीम के पेड़ को शीतला माता का प्रतीक माना गया है जो शीतलता और शुद्धता प्रदान करता है इसलिए यह पेड़ शीतला अष्टमी में महत्वपूर्ण है।
शीतला अष्टमी पर बासी भोजन क्यों खाते हैं?
शीतला अष्टमी पर बासी भोजन खाने का नियम का उद्देश्य बदलते मौसम में एक्टिव बैक्टीरिया के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना है
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