Brahmacharini Mata Ke Upay: देंगे धीरज, आत्म बल और संयम

Brahmacharini Mata Ke Upay
Brahmacharini Mata Ke Upay

Brahmacharini Mata Ke Upay: नवरात्रि के पावन पर्व में दूसरे दिन माँ दुर्गा के द्वितीय स्वरूप, माँ ब्रह्मचारिणी की साधना की जाती है। इनकी पूजा से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है, जिससे साधक को जीवन के कठिन संघर्षों में भी कर्तव्य-पथ पर चलने की शक्ति मिलती है।

किस आर्टिकल में हम माता ब्रह्मचारिणी के तंत्र-मंत्र से जुड़े उपाय (Brahmacharini Mata Ke Upay) के बारे में चर्चा करेंगे और जानेंगे कि किस तरह माता ब्रह्मचारी की साधना और उनसे जुड़े उपाय का उपयोग करके अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं। इसलिए इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें।

कौन हैं माँ ब्रह्मचारिणी (Mata Brahmacharini)

माँ ब्रह्मचारिणी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘ब्रह्म’ अर्थात् तपस्या और ‘चारिणी’ अर्थात् आचरण करने वाली। अर्थात्, ये तप का आचरण करने वाली देवी हैं। इनका रूप बहुत शांत, दिव्य और सौम्य है। ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जो पवित्रता, ज्ञान और शांति का प्रतीक है। इनके दाहिने हाथ में रुद्राक्ष की जपमाला है, जो ध्यान और साधना की प्रतीक है, और बाएँ हाथ में कमंडल है, जो संयम, त्याग और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। ये नंगे पैर रहती हैं, जिससे कठोर तपस्या और सादगी का बोध होता है।

ब्रह्मचारिणी माता का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार, माँ ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक उन्होंने केवल फल-फूल खाकर तपस्या की और बाद में बिना जल के भी शिव की आराधना की। उनकी इस कठिन साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।

उनकी इस तपस्या के कारण ही इन्हें ‘तपश्चारिणी’ या ‘ब्रह्मचारिणी’ कहा जाता है। इनकी आराधना से साधक में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है, जिससे वह जीवन के कठिन संघर्षों में भी कर्तव्य-पथ पर साहस से चलता है। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से साधक को सर्वत्र सिद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है।

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ब्रह्मचारिणी माता के तंत्र-मंत्र से जुड़े उपाय

माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा प्राप्त करने के लिए आप निम्नलिखित तंत्र-मंत्र से जुड़े उपाय कर सकते हैं (Brahmacharini Mata Ke Upay)

  1. बीज मंत्र का जाप: माँ ब्रह्मचारिणी के बीज मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः‘ का 108 बार जाप करें। यह मंत्र साधक को मानसिक शांति और एकाग्रता प्रदान करता है।
  2. ध्यान मंत्र का उच्चारण: ‘वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धारयां ब्रह्मचारिणीम्॥‘ इस ध्यान मंत्र का जाप करने से साधक के मन में संयम और धैर्य की वृद्धि होती है।
  3. स्तोत्र पाठ: ‘तप्तकांचन वर्णाभां तप्यमानां स्वतेजसा। ध्वजाब्ज कमण्डलुं रुद्राक्षमाला विभूषिताम्॥‘ इस स्तोत्र का पाठ करने से साधक देवी की दिव्यता और तेज का अनुभव करता है।
  4. रुद्राक्ष माला से जाप: रुद्राक्ष की माला लेकर श्रद्धा पूर्वक माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें। यह साधना भक्त के आत्मबल और संयम को बढ़ाती है।
  5. कमंडल में जल अर्पण: माँ ब्रह्मचारिणी के चरणों में कमंडल में स्वच्छ जल भरकर अर्पित करें और प्रार्थना करें। यह उपाय जीवन में शांति और संतुलन लाने में सहायक होता है।
  6. सफेद पुष्पों अर्पण करें: माँ ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग के फूल अर्पित करें, जो पवित्रता और शांति के प्रतीक हैं। यह साधना मन की शुद्धि में सहायक होती है।
  7. सुगंधित धूप का प्रयोग: पूजा के दौरान सुगंधित धूप या अगरबत्ती का उपयोग करें, जिससे वातावरण पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हो।
  8. नंगे पैर तपस्या का संकल्प: माँ ब्रह्मचारिणी की तरह नंगे पैर रहकर एक दिन का तप करने का संकल्प लें। यह साधना आत्मसंयम और धैर्य को बढ़ाती है।
  9. अक्षयमाला का जाप: ब्रह्मचारिणी की कृपा पाने के लिए अक्षयमाला (जपमाला) का नियमित जाप करें, जिससे ध्यान और साधना में एकाग्रता बढ़ती है।
  10. कमंडल में गंगाजल भरकर अभिषेक: कमंडल में गंगाजल भरकर माँ ब्रह्मचारिणी की मूर्ति या चित्र का अभिषेक करें। यह उपाय पवित्रता और आंतरिक शुद्धि लाने में सहायक होता है।
maa brahmacharini mantra
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ब्रह्मचारिणी माता के दिन क्या न करें?

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। यदि इन बातों का ध्यान न रखा जाए तो माता की साधना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इस दिन विशेष रूप से निम्नलिखित चीज़ों से बचना चाहिए-

  1. क्रोध और अहंकार से बचें- माँ ब्रह्मचारिणी संयम और तपस्या की देवी हैं, इसलिए इस दिन क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मक भावनाओं से बचना चाहिए। यदि आप किसी पर गुस्सा होते हैं या अपने अहंकार को बढ़ावा देते हैं, तो यह साधना में बाधा उत्पन्न कर सकता है। शांत और विनम्र स्वभाव बनाए रखना चाहिए।
  2. अशुद्ध वस्त्र न पहनें और सफाई का ध्यान रखें- माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गंदे या बिना धुले कपड़े पहनकर पूजा करना अनुचित माना जाता है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को भी पवित्र रखें।
  3. मांसाहार और नशे का सेवन न करें- नवरात्रि में माँ दुर्गा के किसी भी रूप की पूजा के समय सात्त्विक आहार लेना आवश्यक होता है। इस दिन मांस, मछली, अंडे, लहसुन-प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, शराब, सिगरेट, तंबाकू या अन्य किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए। यह साधना की पवित्रता को भंग कर सकता है और मानसिक अशांति उत्पन्न कर सकता है।
  4. कटु वचन न बोलें और किसी का अपमान न करें- इस दिन वाणी पर संयम रखना बहुत जरूरी है। कठोर और अपमानजनक शब्दों का उपयोग करने से बचें। किसी को दुख पहुंचाने वाली बातें न कहें, न ही किसी का अपमान करें। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा प्राप्त करने के लिए दयालुता और प्रेम का व्यवहार अपनाना चाहिए।
  5. आलस्य और अनुशासनहीनता से बचें- माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा तपस्या और अनुशासन का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन अत्यधिक नींद, आलस्य, लापरवाही और अनुशासनहीनता से बचना चाहिए। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पूरे दिन सात्त्विकता और भक्ति भाव में रहें। अनावश्यक सोना, समय बर्बाद करना या व्यर्थ की गतिविधियों में लिप्त रहना अनुचित माना जाता है।

Brahmacharini Mata Ke Upay: यहाँ देखें वीडियो

FAQ- Brahmacharini Mata Ke Upay

नवरात्रि के दूसरे दिन का मंत्र क्या है?

नवरात्रि के दूसरे दिन का मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः‘ है।

ब्रह्मचारिणी माता के दिन नंगे पैर तपस्या करने से क्या होता है?

ब्रह्मचारिणी माता के दिन नंगे पैर तपस्या करने से धीरज और साहस बढ़ता है।

ब्रह्मचारिणी माता को किस तरह के फूल अर्पित किए जाने चाहिए?

ब्रह्मचारिणी माता को सफेद फूल अर्पित किए जाने चाहिए।

नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का क्या फल मिलता है?

नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्त को त्याग वैराग्य और संयम की प्राप्ति होती है।

माता ब्रह्मचारिणी का अन्य नाम क्या है?

माता ब्रह्मचारिणी का अन्य नाम तपश्चारिणी है।

Anu Pal

मैं अनु पाल, Wisdom Hindi ब्लॉग की फाउंडर हूँ। मैं इंदौर मध्य प्रदेश की रहने वाली हूं। मैं एक ब्लॉगर और Content Writer के साथ-साथ Copy Editor हूं और 5 साल से यह काम कर रही हूं। पढ़ने में मेरी विशेष रूचि है और मैं धर्म, आध्यात्म, Manifestation आदि विषयों पर आर्टिकल्स लिखती हूं।

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