शरीर के 7 चक्र: एक भी असंतुलित हुआ तो जीवन में आती है तबाही — जानिए कैसे ठीक करें

Chakra Balance Kaise Kare
7 चक्र क्या हैं और इन्हें बैलेंस कैसे करें?

Chakra Balance Kaise Kare: क्या आपने कभी महसूस किया है कि सब कुछ ठीक होने के बाद भी अंदर से कुछ टूटा-टूटा सा लगता है? नींद पूरी होती है फिर भी थकान रहती है। रिश्ते हैं फिर भी अकेलापन महसूस होता है। पैसा है फिर भी मन में डर और बेचैनी है। डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो कहते हैं– “सब नॉर्मल है।” लेकिन आप जानते हैं कि कुछ नॉर्मल नहीं है।

सच यह है कि इन सब समस्याओं की जड़ आपके शरीर में नहीं, आपकी ऊर्जा में है। प्राचीन भारतीय योग परंपरा हजारों साल पहले ही यह रहस्य जान चुकी थी कि मानव शरीर सिर्फ हड्डियों और मांस का ढांचा नहीं है, यह एक जीवंत ऊर्जा प्रणाली है। और इस प्रणाली को चलाते हैं 7 चक्र– सात ऐसे ऊर्जा केंद्र जो आपके मन, शरीर और आत्मा को एक धागे में पिरोए रखते हैं।

जब ये संतुलित होते हैं तो जीवन में प्रवाह रहता है, खुशी, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, प्रेम सब अपने आप आने लगता है। लेकिन जैसे ही इनमें से एक भी चक्र अवरुद्ध हो जाए तो पूरी व्यवस्था डगमगा जाती है। आइए जानते हैं ये 7 चक्र क्या हैं, शरीर में कहाँ हैं, और इन्हें संतुलित करने के लिए आपको क्या करना होगा। 

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शरीर में मौजूद 7 चक्र कहां स्थित होते हैं और उन्हें कैसे संतुलित किया जाए

मूलाधार चक्र:  मूलाधार चक्र शरीर का सबसे पहले चक्र होता है, इस रूट चक्र(Root Chakra) भी कहा जाता है। यह हमारी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में स्थित होता है। इसे सुरक्षा और जीवन की मूलभूत जरूरत का प्रतीक कहा जाता है। यह चक्र जब संतुलित होता है तो व्यक्ति सुरक्षित महसूस करता है। परंतु मूलाधार चक्र असंतुलित हो जाए तो मानसिक अशांति, आर्थिक चिंता, अस्थिरता महसूस होती है।

मूलाधार चक्र संतुलित करने के लिए व्यक्ति को रोजाना ध्यान, प्राणायाम करना चाहिए। कोशिश करें कि प्रकृति के संपर्क में रहें, हरे पौधों को देखें, नंगे पैर जमीन पर चलें, जमीन पर बैठकर भोजन करें, लाल रंग के भोजन का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें।

स्वाधिष्ठान चक्र: स्वाधिष्ठान चक्र हमारे शरीर का दूसरा मुख्य चक्र होता है। यह चक्र नाभि के नीचे पेट के हिस्से में स्थित होता है। इसे सैक्राल चक्र भी कहते हैं। यह चक्र रचनात्मक भावनाओं और रिश्तों का चक्र होता है। यदि यह चक्र असंतुलित हो गया तो यह उदासी, भावनात्मक कमजोरी और रिश्तों की परेशानी पैदा करता है। इस चक्र का संतुलित होना अर्थात व्यक्ति भावनात्मक रूप से मजबूत है। ऐसा व्यक्ति रचनात्मक कार्य में काफी आगे होता है।

स्वादिष्ठान चक्र को संतुलित करने के लिए रोजाना किसी नए क्रिएटिव काम में जुटे रहे। यदि लिखना पसंद है तो कुछ लिखें, नृत्य करना या ड्राइंग करना पसंद है तो अपनी गतिविधि जारी रखें। किसी न किसी क्रिएटिव काम में व्यस्त रहें। नारंगी रंग के भोजन का सेवन करें। नियमित ध्यान करें हो सके तो नारंगी रंग के ही कपड़े।

Root Chakra and Sacral Chakra
Root Chakra and Sacral Chakra

मणिपुर चक्र: मणिपुर चक्र नाभि के ऊपर पेट के बीच वाले हिस्से में होता है। इस सोलर प्लेक्सस चक्र भी कहा जाता है। यह सूर्य की ऊर्जा और व्यक्तिगत शक्ति का केंद्र होता है। जब यह चक्र असंतुलित होता है तो आत्मविश्वास की कमी, डर, असफलता का भय बढ़ जाता है। इस चक्र का संतुलित होना अर्थात व्यक्ति आत्मविश्वास से भरपूर है। ऐसे व्यक्ति की निर्णय क्षमता भी मजबूत होती है।

मणिपुर चक्र को संतुलित करने के लिए रोजाना सूर्य नमस्कार करें। सूर्य के उजाले में कुछ देर बिताएं, पीले रंग के भोजन का सेवन करें। पीले रंग के कपड़े पहनें, केला और हल्दी का सेवन शुरू कर दें। नियमित योगभ्यास करें और सकारात्मक सोच विकसित करें हो सके ओवरथिंकिंग का त्याग करें।

अनाहत चक्र: अनाहत चक्र छाती के बीचो-बीच स्थित होता है। इस प्रेम, दया और करुणा का केंद्र कहा जाता है। अनाहत चक्र को हार्ट चक्र भी कहा जाता है। हार्ट चक्र का सीधा संबंध हमारे दिल से होता है। यदि यह असंतुलित हो गया तो व्यक्ति अपनों के बीच होकर भी अकेलापन महसूस करता है। दुख और भारीपन से घिरा रहता है।

रिश्तो में दूरी महसूस करता है। हार्ट चक्र संतुलित रहने पर व्यक्ति सहानुभूति पूर्ण होता है। उसकी मेनिफेस्टेशन काम करने लगती है। ऐसा व्यक्ति दयालु और करुणामयी हो जाता है। अनाहत चक्र संतुलित करने के लिए ध्यान का अभ्यास करें, कृतज्ञता का अभ्यास करें, जितना हो सके दूसरों की मदद करें। घर में हरे रंग के पौधे लगाएँ। हरे रंग को जितना ज्यादा हो सके अपने आसपास रखें। हरे रंग के भोजन का सेवन करें और सकारात्मक सोच का रास्ता अपनाएं।

Solar Plexus Chakra and Heart Chakra
Solar Plexus Chakra and Heart Chakra

विशुद्ध चक्र: विशुद्ध चक्र हमारे गले में स्थित होता है। इसे थ्रोट चक्र(Throat Chakra) भी कहते हैं। यह चक्र संवाद अभिव्यक्ति और सच्चाई से जुड़ा होता है विशुद्ध चक्र का असंतुलन संवाद की समस्या, झिझक और डर पैदा करता है। वहीं यदि यह चक्र संतुलित हो तो व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ अपनी बात करता है।

जिन लोगों का विशुद्ध चक्र एक्टिव होता है उनकी कही बातें भी सच होने लगती हैं। मेनिफेस्टेशन की शक्ति बढ़ जाती है। विशुद्ध चक्र संतुलित करने के लिए जितना हो सके मंत्र जाप करें, ध्यान करें, भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करें। सच बोलने की आदत विकसित करें जितना हो सके भजन गायें। संगीत सुन पानी ज्यादा पिएँ।

आज्ञा चक्र : आज्ञा चक्र को थर्ड आई चक्र(Third Eye Chakra) कहा जाता है, यह हमारी भौहों के बीच माथे के केंद्र में होता है। यह चक्र मानसिक स्पष्टता, बुद्धि और इनट्यूशन का चक्र होता है। जब यह चक्र एक्टिव होता है तब व्यक्ति आध्यात्मिकता के नजदीक जाता है। उसे वर्तमान भूतकाल और भविष्य की जानकारी होने लगती है।

इस चक्र का संतुलित होना मतलब व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होना, अंतर ज्ञान की शक्ति बढ़ना। वहीं चक्र असंतुलित होना मतलब भय, तनाव और निर्णय लेने में कठिनाई होना। आज्ञा चक्र को संतुलित करने के लिए नियमित ध्यान करें, स्क्रीन टाइम कम करें, जितना हो सके शांति में रहे और शांत वातावरण में समय बिताएँ, गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। त्राटक अभ्यास से भी आज्ञा चक्र संतुलित होता है।

Throat Chakra and Third Eye Chakra
Throat Chakra and Third Eye Chakra

सहस्रार चक्र: सहस्त्रार चक्र हमारे सर के ऊपर स्थित होता है। इसे आध्यात्मिक जागरूकता और परम चेतना का चक्र माना जाता है। इसे इंग्लिश में क्रॉउन चक्र(Crown Chakra) भी कहा जाता है। जब यह चक्र असंतुलित होता है तो व्यक्ति भय, निराशा खालीपन महसूस करता है। सब कुछ होने के बाद भी ऐसा व्यक्ति पूर्ण नहीं महसूस कर पाता।

जब यह चक्र संतुलित होता है तो व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है। संतोष जीवन में आने लगता है। वह जीवन के गहरे अर्थ को समझने लगता है। होने वाली घटनाओं को जोड़कर कृतज्ञ रहना सीख लेता है। सहस्रार चक्र संतुलित करने के लिए नियमित योग ध्यान अभ्यास करें, आध्यात्मिक ग्रंथ पढ़ें, सकारात्मक सोच बनाए रखें और जितना हो सके प्रकृति के बीचो-बीच समय बिताएं।

Crown Chakra
Crown Chakra

चक्र संतुलन के कुछ सामान्य उपाय 

यदि कोई व्यक्ति अपने सातों चक्रों को संतुलित रखना चाहता है तो उसे कुछ आसान आदत अपनानी होगी। सबसे पहले नियमित ध्यान और प्राणायाम करें। श्वास थेरेपी का अभ्यास शुरू कर दें। रोजाना सूर्य नमस्कार पद्मआसन वृक्षआसन से चक्र संतुलन करना काफी आसान तरीका होता है। इसके अलावा क्रिस्टल थेरेपी से भी चक्र संतुलित किया जा सकते हैं जैसे कि क्लियर क्वार्ट्ज़, एमेथिस्ट और रोज क्वार्ट्ज़ चक्र को संतुलित करने में मदद करते हैं। साथ ही तामसिक आहार से दूर रहें। पर्याप्त नींद लें और सकारात्मक सोच को शामिल करें।

निष्कर्ष: Chakra Balance Kaise Kare

मानव शरीर केवल भौतिक तत्वों से नहीं बना है बल्कि यह ऊर्जा का एक विशिष्ट केंद्र है। सात चक्र इसी ऊर्जा प्रणाली के द्वार है ऐसे में इन सातों चक्रों को संतुलित रखने पर ही शरीर स्वस्थ रहता है। मानसिक और आध्यात्मिक विकास प्राप्त करता है। इस पूरी प्रक्रिया में यदि एक चक्र भी असंतुलित हो गया तो सातों चक्र का कनेक्शन टूट जाता है इसीलिए जरूरी है कि सातों चक्रों को संतुलित करें और जीवन में ऊर्जा खुशी लाएं।

FAQ: Chakra Balance Kaise Kare

चक्र संतुलन कैसे किया जा सकता है?

चक्र संतुलन करने के लिए नियमित रूप से योग, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। इसके अलावा सूर्य नमस्कार, पद्मासन और वृक्षासन जैसे योगासन भी चक्रों को संतुलित करने में मदद करते हैं। सकारात्मक सोच, पर्याप्त नींद, सात्विक आहार और प्रकृति के संपर्क में रहना भी चक्र संतुलन के लिए लाभदायक माना जाता है।

सबसे शक्तिशाली चक्र कौन सा है?

सहस्रार चक्र को सबसे शक्तिशाली चक्र माना जाता है। यह सिर के ऊपर स्थित होता है और आध्यात्मिक चेतना तथा परम ज्ञान से जुड़ा होता है। जब सहस्रार चक्र संतुलित होता है तो व्यक्ति को आंतरिक शांति, संतोष और जीवन के गहरे अर्थ की समझ प्राप्त होती है।

नाभि के ठीक पास कौन सा चक्र होता है?

नाभि के पीछे मणिपुर चक्र स्थित होता है। इसे सोलर प्लेक्सस चक्र भी कहा जाता है। यह चक्र आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और व्यक्तिगत शक्ति से जुड़ा होता है। जब यह संतुलित रहता है तो व्यक्ति आत्मविश्वासी और निर्णय लेने में सक्षम बनता है।

सातों चक्रों के असंतुलित होने के क्या संकेत होते हैं?

जब चक्र असंतुलित होते हैं तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, भावनात्मक कमजोरी, आत्मविश्वास की कमी, रिश्तों में दूरी, संवाद की समस्या और जीवन में असंतोष जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हर चक्र का असंतुलन अलग-अलग प्रकार की भावनात्मक और मानसिक चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।

क्या ध्यान और योग से चक्रों को सक्रिय किया जा सकता है?

हाँ, नियमित ध्यान और योग अभ्यास से चक्रों को संतुलित और सक्रिय किया जा सकता है। प्राणायाम, मंत्र जाप, त्राटक अभ्यास और सूर्य नमस्कार जैसे अभ्यास शरीर की ऊर्जा को संतुलित करते हैं और चक्रों के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Anu Pal

मैं अनु पाल, Wisdom Hindi ब्लॉग की फाउंडर हूँ। मैं इंदौर मध्य प्रदेश की रहने वाली हूं। मैं एक ब्लॉगर और Content Writer के साथ-साथ Copy Editor हूं और 5 साल से यह काम कर रही हूं। पढ़ने में मेरी विशेष रूचि है और मैं धर्म, आध्यात्म, Manifestation आदि विषयों पर आर्टिकल्स लिखती हूं।

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