
How To Control Overthinking: दोस्तों हम इंसानों की सोचने समझने की ताकत हमें अन्य प्राणियों से अलग बनाती है। हालांकि, जब इस सोचने-समझने की ताकत का इस्तेमाल हम आवश्यकता से अधिक करने लगते हैं, तो इसे ओवरथिंकिंग (Overthinking) कहा जाता है। ओवरथिंकिंग न केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि हमारी शारीरिक सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। इसलिये इस आर्टिकल में हम ओवरथिंकिंग के कारण, लक्षण, इसके साइड इफेक्ट और इसे कंट्रोल करने के उपायों (How To Control Overthinking) पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसलिए इस आर्टिकल को ध्यान से जरूर पढ़ें।
ओवरथिंकिंग क्या है?
ओवरथिंकिंग का सामान्य मतलब है जरूर से ज्यादा सोचना। यह वह मानसिक अवस्था है जिसमें व्यक्ति किसी विषय, किसी घटना या समस्या पर आवश्यकता से अधिक विचार करता है, के कारण वह चिंता, तनाव और अनिर्णय की स्थिति में फंस जाता है। यह आदत व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है और उसे आज में जीने से रोकती है। इस ओवरथिंकिंग के पीछे कई कारण (Overthinking Causes) जिम्मेदार होते हैं।
क्या हैं ओवरथिंकिंग के कारण
ओवरथिंकिंग के कई संभावित कारण हो सकते हैं (Causes Of Overthinking)
असुरक्षा की भावना: सुरक्षा की भावना या आत्मविश्वास की कमी के कारण व्यक्ति अपने अपने लिए गए फैसलों पर शक करने लगता है। इसके कारण वह बहुत अधिक सोचने लगता है
अतीत में हुए नकारात्मक अनुभव: कुछ मामलों में अतीत में घटित हुई बुरी घटनाओं के अनुभव और उनके कारण पैदा हुई नकारात्मकता इंसान को अपने भविष्य को लेकर चिंतित बना देती हैं।
भविष्य की अनिश्चितता: यह सबसे बड़ा कारण है जिसके कारण ज्यादातर लोग ओवरथिंकिंग की समस्या से घिरे रहते हैं। आने वाले समय के प्रति अनिश्चितता और डर के कारण व्यक्ति बहुत अधिक सोचने लगता है।
पूर्णता की चाहत: परफेक्शनिज्म (Perfectionism) यानी कि सब कुछ सर्वश्रेष्ठ होने की गहरी इच्छा की प्रवृत्ति व्यक्ति को हर छोटे-बड़े फैसले पर गहराई से सोचने के लिए मजबूर करती है।
तनाव: यह भी ओवर थिंकिंग के बड़े कारणों में गिना जाता है। व्यक्तिगत या पेशेवर जीवन में बढ़ती प्रतिस्पर्धा की भावना और तनाव ओवरथिंकिंग का प्रमुख कारण हो सकता है।
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ओवरथिंकिंग के लक्षण क्या हैं
ओवरथिंकिंग की समस्या को पहचानना बहुत आसान है। कुछ सामान्य लक्षण इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आप ओवर थिंकिंग की समस्या से ग्रसित है। ओवरथिंकिंग के ये लक्षण (Overthinking Symptoms) निम्नलिखित हैं:
- अगर आपको नींद की कमी या अनिद्रा जैसी समस्याएं हो रही हैं तो इसके पीछे ओवरथिंकिंग एक कारण हो सकती है
- अगर आप खुद को किसी काम में ध्यान लगाने में असमर्थ पा रहे हैं तो संभव है कि आप ओवर थिंकिंग के शिकार हैं।
- जब आप ओवर थिंकिंग की समस्या का सामना कर रहे होते हैं तो के साथ छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या भावनात्मक अस्थिरता जैसी चीज़ें होती हैं।
- ओवरथिंकिंग के कारण मानसिक तनाव होता है जिसके कारण आप अपने अंदर एनर्जी की कमी महसूस करते हैं और आपको बार-बार थकान भी महसूस होती है।
- ओवरथिंकिंग के कारण आप अपने जीवन के छोटे-मोटे फैसले लेने में भी असमर्थ महसूस करते हैं।
क्या हैं ओवरथिंकिंग के दुष्प्रभाव
ओवरथिंकिंग के कई नेगेटिव प्रभाव हो (Overthinking Side Effects) सकते हैं, अरे जो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करते हैं। ओवर थिंकिंग के कारण होने वाला निरंतर तनाव हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
इसके अलावा ओवरथिंकिंग के तनाव के कारण हमारा पाचन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे गैस, एसिडिटी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। लगातार तनाव से इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
इसके साथ ही ओवरथिंकिंग कई मानसिक विकारों का कारण भी बनती है। ओवरथिंकिंग से अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक विकार हो सकते हैं। बहुत ज्यादा सोचने के कारण नींद में बाधा आती है, जिससे अनिद्रा की समस्या हो सकती है।
ओवरथिंकिंग से कैसे बचें
ओवरथिंकिंग को एक दिन में काम नहीं किया जा सकता। बल्कि इसके लिए निरंतर अभ्यास और सही मानसिकता जरूरी होती है। आगे बताए जा रहे कुछ उपाय की मदद से आप ओवरथिंकिंग को काम कर सकते हैं (How To Reduce Overthinking)
गहरी साँसें लें और ध्यान करें– जब आप बहुत ज्यादा सोचते हैं तो आपका दिमाग तनाव मोड (Fight or Flight Mode) में आ जाता है। ऐसे नहीं अगर आप गहरी साँसें लें तो आपका नर्वस सिस्टम शांत होता है और विचारों का बहाव धीमा पड़ता है। इसके लिए आप 4-7-8 तकनीक (4-7-8 Breathing) अपनाएँ।
इस तकनीक में पहले 4 सेकंड तक गहरी साँस लें। अब 7 सेकंड तक साँस रोकें। अब 8 सेकंड तक धीरे-धीरे साँस छोड़ें। इसके अलावा दिन में कम से कम 10 मिनट का ध्यान (Meditation) करने से मन को नियंत्रित करने की क्षमता बढ़ती है।

“स्टॉप” तकनीक अपनाएँ– यह तकनीक अचानक आए नकारात्मक और अनावश्यक विचारों को रोकने में मदद करती है। जब भी अनावश्यक विचार आएं, जोर से या मन में “STOP” कहें।
या फिर तुरंत किसी और काम में ध्यान लगाएँ, जैसे कि टहलना, पानी पीना या म्यूजिक सुनना। नियमित प्रेक्टिस करने से यह आदत बन सकती है और ओवरथिंकिंग की आदत कमजोर हो सकती है।
अपने विचारों को लिखें (Journaling)– अब कोई विचार आपके दिमाग में घूमता रहता है तो वह अधिक उलझा हुआ लग सकता है। ऐसे में उसे विचार को लिखना बहुत फायदेमंद हो सकता है क्योंकि जब आप उसे लिखते हैं, तो वह स्पष्ट और व्यवस्थित हो जाता है। इसके लिए आप इन दो तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- ब्रेन डंप तकनीक: हर दिन 5-10 मिनट तक बिना रुके अपने दिमाग में आने वाले विचारों को लिखें।
- प्रॉब्लम-सॉल्विंग जर्नल: इस तकनीक में जो विचार आपको सबसे ज्यादा परेशान कर रहे हैं, उनके संभावित हल भी लिखने होते हैं।
आज में जीने की प्रैक्टिस करें (Mindfulness)– अधिकतर हम ओवरथिंकिंग अतीत की गलतियों या आने वाले कल की चिताओं के बारे में करते हैं। इंडफुलनेस आपको वर्तमान क्षण में ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। दिन में कुछ मिनटों के लिए ध्यान दें कि आप क्या कर रहे हैं। इसके लिए आप “5-4-3-2-1” ग्राउंडिंग तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं जो इस तरह है-
- 5 चीजें देखें
- 4 चीजें छूएँ
- 3 चीजें सुनें
- 2 चीजें सूंघें
- 1 चीज का स्वाद लें
यह तकनीक आपको वर्तमान में रहने में मदद करेगी और चिंता काम करेगी।
निर्णय लेने की प्रक्रिया को सरल बनाएँ– ओवरथिंकिंग का एक मुख्य कारण यह है कि हम चीज के बारे में सही फैसला लेने को लेकर बहुत ज्यादा सोचते हैं। इस परेशानी से बचने के लिए फैसला लेने के लिए एक समय सीमा निर्धारित करें। “2 मिनट नियम” अपनाएँ यानि यदि कोई निर्णय 2 मिनट में लिया जा सकता है, तो उसे तुरंत लें। अगर निर्णय बड़ा है, तो इसके लिए फायदे और नुकसान (Pros & Cons) की लिस्ट बना लें।
शरीर को एक्टिव रखने के लिए व्यायाम करें– कसरत करने से तनाव हार्मोन (Cortisol) का स्तर घटता है और मानसिक शांति बढ़ती है। रोज 30 मिनट की कोई भी फिजिकल एक्टिविटी करें, जैसे योग, दौड़ना या डांस। सुबह की सैर को अपनी रूटीन में शामिल करें। स्ट्रेचिंग और डीप ब्रेथिंग एक्सरसाइज करें।

पूर्णता (Perfectionism) की चाह को कम करें– ओवरथिंकिंग कई बार परफेक्शनिज्म के कारण भी होती है। जब हम हर चीज को परफेक्ट बनाना चाहते हैं, तो हम ज़रूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं। याद रखें किसी काम को परफेक्ट बनाने से ज्यादा उसे पूरा करना जरूरी है। अगर आप किसी काम में असफल भी हो जाते हैं तो उसे सीखने के अवसर के रूप में देखें। छोटे-छोटे कार्यों पर ध्यान दें और धीरे-धीरे सुधार करें।
खुद को माफ़ करें (Self-Forgiveness)– ओवरथिंकिंग अक्सर अतीत की गलतियों पर बार-बार सोचने से होती है। जब आप खुद को माफ करना सीख जाते हैं, तो यह आदत कम होने लगती है। अपनी गलतियों से सीखें, लेकिन उन पर बार-बार पछतावा न करें। पॉजिटिव सेल्फ टॉक (Positive Self-Talk) की प्रैक्टिस करें। अपनी सफलता और छोटी-छोटी उपलब्धियों को स्वीकार करें।
सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम को सीमित करें– अत्यधिक सोशल मीडिया हमारे अंदर दूसरों से तुलना करने और अनावश्यक रूप से चिंता करने की प्रवृत्ति बढ़ाती है। डिजिटल डिटॉक्स करें – दिन में कुछ घंटे बिना स्क्रीन के बिताएँ। सोशल मीडिया पर केवल पॉजिटिव और प्रेरणादायक कंटेंट देखें। सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप बंद कर दें।
जरूरत पड़े तो प्रोफेशनल हेल्प लें – अगर ओवरथिंकिंग आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को बहुत ज्यादा प्रभावित कर रही है, तो प्रोफेशनल मदद लेना फायदेमंद हो सकता है। साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर से बात करें। CBT (Cognitive Behavioral Therapy) जैसी तकनीकों का उपयोग करें। रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएँ, जैसे प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन (PMR)।
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FAQ: How To Control Overthinking
ओवरथिंकिंग से कैसे बचे?
ओवरथिंकिंग से बचने के लिए खुद को काम में उगना बहुत अच्छा तरीका है इसके अलावा सोशल मीडिया से दूरी बनाना कुछ माइंडफूलनेस तकनीक अपनाना भी फायदेमंद है।
ओवरथिंकिंग के लक्षण क्या है?
मानसिक तनाव होना नींद ना आना किसी काम में मन ना लगना यह सब ओवर थिंकिंग के लक्षण हैं।
सोशल मीडिया किस तरह हमारी ओवरथिंकिंग बढ़ाता है?
सोशल मीडिया पर हम दूसरों की लाइफ स्टाइल देखकर खुद से कंपैरिजन करने लगते हैं और इस तरह हमारी ओवरथिंकिंग बढ़ जाती है।
क्या एक्सरसाइज ओवरथिंकिंग कम करने में फायदेमंद है?
हां एक्सरसाइज ओवरथिंकिंग कम करने में बहुत फायदेमंद है।
जर्नलिंग किस तरह से हमारी ओवरथिंकिंग को काम करती है?
जर्नलिंग से हमें अपने विचारों को लेकर क्लेरिटी मिलती है और इस तरह से हमारे लिए फैसले लेने आसान हो जाता है। यह तरीका हमारी ओवर थिंकिंग को कम करने में मददगार है।
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