Why Letting Go is Important: जितना छोड़ेंगे, उतना पाएंगे, मेनिफेस्टेशन का नियम

Why Letting Go is Important
Why Letting Go is Important

Why Letting Go is Important: क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी चीज़ को पागलों की तरह चाहते हैं, उसके लिए दिन-रात विजुअलाइजेशन (visualization) करते हैं, लेकिन वह चीज़ आपसे उतनी ही दूर भागती महसूस होती है? और फिर जैसे ही आप हार मानकर उसे छोड़ देते हैं या उस पर ध्यान देना बंद कर देते हैं, वह अचानक आपके जीवन में आ जाती है। 

यह कोई इत्तेफाक नहीं है। इसे ‘समर्पण का विरोधाभास’ (The Paradox of Surrender) कहा जाता है। मेनिफेस्टेशन की दुनिया में लेट गो (Letting Go) करना वह सीक्रेट एलिमेंट है जिसे अक्सर लोग समझ नहीं पाते। आज के इस लेख में हम गहराई से समझेंगे कि आखिर क्यों पकड़ ढीली करना ही वास्तव में पाने का रास्ता है।

लगाव (Attachment) कैसे बाधा बन जाता है?

रिसर्च के अनुसार आप किसी चीज़ के प्रति जितना ज्यादा लगाव (Attachment) रखते हैं, आप अनजाने में उतनी ही अधिक बाधाएं उत्पन्न करते हैं। जब आप किसी इच्छा को बहुत कसकर पकड़ते हैं, तो आप यूनिवर्स को यह संदेश भेज रहे होते हैं कि वह चीज़ अभी मेरे पास नहीं है। यह कमी (lack) की भावना एक मेन्टल रेजिस्टेंस (resistance) पैदा करती है।

इसे अटेंशन और वाइब्रेशन के खेल के रूप में देखें। जब आप किसी चीज़ को पेडस्टल (ऊँचे स्थान) पर रख देते हैं, तो आप खुद को उससे कमतर आंकने लगते हैं। यह असंतुलन मेनिफेस्टेशन को आपके लिए अस्वाभाविक बना देता है।

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क्रिएशन इज फिनिश्ड: जो आप चाहते हैं, वह पहले से मौजूद है

नेविल गोडार्ड कहते हैं Creation is finished। इसका मतलब है कि हर वह वास्तविकता जिसे आप पाना चाहते हैंबवह अनंत वर्तमान में पहले से मौजूद है। 

मेनिफेस्टेशन का मतलब कुछ नया बनाना नहीं है, बल्कि उस वास्तविकता को चुनना है जो पहले से है। जब आप इस बात को गहराई से समझ लेते हैं, तो आपकी बेचैनी खत्म हो जाती है। आप एक रेडियो ट्यूनर की तरह बन जाते हैं, जो बस अपनी फ्रीक्वेंसी बदलता है ताकि उस स्टेशन को सुना जा सके जो पहले से ही ब्रॉडकास्ट हो रहा है। 

How to Let Things Go That Bother You
How to Let Things Go That Bother You

चुंबकीय ऊर्जा: डिटैचमेंट एनर्जी का जादू

एक दिलचस्प उदाहरण से इसे समझिए। जब एक सेल्समैन जूते बेचने के लिए बहुत अधिक बेताब (desperate) होता है, तो लोग उससे दूर भागते हैं। लेकिन जब वह इस बात की चिंता छोड़ देता है कि कोई खरीदेगा या नहीं, तो उसकी ऊर्जा चुंबकीय (magnetic) हो जाती है और बिक्री बढ़ जाती है।

यही सिद्धांत आपके जीवन के हर क्षेत्र में काम करता है। लेट गो करने का मतलब इच्छा को छोड़ना नहीं, बल्कि परिणाम के प्रति बेताबी को छोड़ना है।

फील इट टू हील इट: भावनाओं को दबाएं नहीं

अक्सर लोग मेनिफेस्टेशन के चक्कर में टॉक्सिक पॉजिटिविटी का शिकार हो जाते हैं। वे सोचते हैं कि नेगेटिव फीप करना गलत है। लेकिन एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आपको अपनी भावनाओं के प्रति ईमानदार होना चाहिए। अगर आप डर या कमी महसूस कर रहे हैं, तो उसे स्वीकार करें। 

जब आप अपनी भावनाओं को बिना किसी निर्णय के महसूस करते हैं, तो वे ऊर्जा के रूप में शरीर से बाहर निकल जाती हैं। इसे ‘सबथ’ (Sabbath) या विश्राम की स्थिति कहा जाता है जहाँ आप अपनी इच्छा के बीज बोने के बाद, बार-बार मिट्टी खोदकर उसे देखते नहीं हैं, बल्कि उसके बढ़ने पर भरोसा करते हैं।

एक अनोखी एक्सरसाइज: बोतल पकड़ने की प्रैक्टिस

लेट गो का प्रैक्टिस करने का एक बहुत ही आसान तरीका है। मान लीजिए आप किसी खास चीज़ जैसे नई कार को मेनिफेस्ट करना चाहते हैं। अब लेट गो प्रेक्टिस करने के लिए आप:-

  • एक बोतल उठाएं और कल्पना करें कि यह आपकी वह इच्छा है। 
  • उसे पूरी ताकत से पकड़ें। एक घंटे, दो घंटे… तब तक जब तक आपका हाथ दर्द न करने लगे और आप असहज (uncomfortable) न हो जाएं। 
  • जब आप थक जाएँ तो उसे छोड़ दें जैसे ही आप उसे छोड़ेंगे, आप एक शारीरिक और मानसिक राहत महसूस करेंगे। 

यह एक्सरसाइज आपके दिमाग को सिखाती है कि पकड़कर रखने में दर्द है और छोड़ देने में स्वतंत्रता। यह आपके भौतिक जुड़ाव को खत्म कर देती है, जबकि इच्छा मन में बनी रहती है।

The Science of Letting Go
The Science of Letting Go

वू वेई (Wu Wei): बिना प्रयास के काम

चीनी दर्शन में इसे ‘वू वेई’ कहा जाता है यानी प्रवाह के साथ चलना। यह पानी की तरह होने जैसा है, जो अपना रास्ता खुद बनाता है बिना किसी संघर्ष के। जब आप मेनिफेस्टेशन में लेट गो करते हैं, तो आप वास्तव में यूनिवर्स के इस सहज प्रवाह के साथ जुड़ जाते हैं। 

निष्कर्ष: Why Letting Go is Important

लेट गो करने का मतलब हार मानना नहीं है, बल्कि यह कहना है कि मुझे अपनी दृष्टि पर भरोसा है, लेकिन मैं इसके ‘कैसे’ और ‘कब’ का कंट्रोल यूनिवर्स को सौंपता हूँ। अगली बार जब आप खुद को अपनी इच्छा के लिए परेशान पाएं, तो बस गहरी सांस लें और खुद से कहें यह पहले से ही मेरा है, और अब मैं इसे अपने पास आने के लिए रास्ता दे रहा हूँ।

याद रखें आप वह मेनिफेस्ट नहीं करते जो आप चाहते हैं, बल्कि वह मेनिफेस्ट करते हैं जो आप हैं। इसलिए अपनी पहचान को ‘पाने की इच्छा रखने वाले’ से बदलकर ‘पा लेने वाले’ की स्थिति में ले आएं।

Anu Pal

मैं अनु पाल, Wisdom Hindi ब्लॉग की फाउंडर हूँ। मैं इंदौर मध्य प्रदेश की रहने वाली हूं। मैं एक ब्लॉगर और Content Writer के साथ-साथ Copy Editor हूं और 5 साल से यह काम कर रही हूं। पढ़ने में मेरी विशेष रूचि है और मैं धर्म, आध्यात्म, Manifestation आदि विषयों पर आर्टिकल्स लिखती हूं।

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